Ganapati

श्री महागणेश पञ्चरत्नम्

हंसध्वनि – तेवरा मुदाकरात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् …

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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

नवरोज-कहर्वा  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा । माता जाकि पार्वती पिता महादेवा ।। एकदन्त दयावन्त चार भुजधारी । माथे पर तिलक सोहे मूषकी सवारी ॥ पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा । भगवान का भोग लगे सन्त करे सेवा ॥ अन्धे को आँख देत कोदिन को काया । बाँझन को पुत्र देत …

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गणराज गजानन गावा हो

मोहनम्-त्रिताल  गणराज गजानन गावा हो । । सिन्दूर चर्चित शुण्ड विराजित । मोदक हस्त पहावा हो ।। विघ्न विनायक बुद्धिप्रकाशक । तो वरदायक ध्यावा हो । । आनन्दात्मज चिन्तित सेवित । हाभव सिन्धु तरावा हो ।।

प्रथम सुमर श्रीगणेश

यमन-एकताल  प्रथम सुमर श्रीगणेश गौरीसुत प्रिय महेश । सकल विघन भय कलेश दूर से निवारे ।। लम्बोदर भुज विशाल कर त्रिशूल चन्द्र भाल । शोभत गल पुष्पमाल रक्तवसन धारे ।। ऋद्धि सिद्धि दोउ नार चमर करत बार बार । मूषकवाहन सवार भक्तन हितकारे ॥ पूरण गुणगणनिधान सुरमुनियश करत गान । ब्रह्मानन्द चरणध्यान सकल काज सारे …

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जय गणेश गणनाथ दयानिधि

शंकरा-त्रिताल जय गणेश गणनाथ दयानिधि । सकल विघन कर दूर हमारे ॥ प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारे । तिसके पूरण कारज सारे ॥ लम्बोदर गजवदन मनोहर । कर त्रिशूल परशूवर धारे ॥ ऋद्धि सिद्धि दोउ चमर डुलावे । मूषकवाहन परम सुखारे ॥ ब्रह्मादिक सुर ध्यावत मनमे । । ऋषिमुनिगण सब दास तुम्हारे ॥ ब्रह्मानन्द सहाय …

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गायिये गणपति जगवन्दन

भूपालि-त्रिताल गायिये गणपति जगवन्दन । शङ्करसूवन भवानीनन्दन ।। सिद्धिसदन गजवदन विनायक । कृपासिन्धु सुन्दर सब दायक ॥ मोदकप्रिय मुदमङ्गलदाता । विद्यावारिधि बुद्धिविधाता ॥ मांगत तुलसीदास कर जोरे । बसहि रामसिया मानस मोरे ॥

अजं निर्विकल्पं

भैरवी-झाँपताल  अजं निर्विकल्पं निराकारमेकं निरानन्दमानन्दमद्वैतपूर्णम् ।  परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीह ।  परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ।।  गुणातीतमानं चिदानन्दरूपं   चिदाभासकं सर्वगं ज्ञानगम्यम् ।  मुनिध्येयमाकाशरूपं परेशं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ।।  जगत्कारणं कारणज्ञानरूपं सुरादिं सुखादिं गणेशं गुणेशम् ।  जगद्व्यापिनं विश्ववन्द्यं सुरेशं  परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥