Brahmananda

प्रथम सुमर श्रीगणेश

यमन-एकताल  प्रथम सुमर श्रीगणेश गौरीसुत प्रिय महेश । सकल विघन भय कलेश दूर से निवारे ।। लम्बोदर भुज विशाल कर त्रिशूल चन्द्र भाल । शोभत गल पुष्पमाल रक्तवसन धारे ।। ऋद्धि सिद्धि दोउ नार चमर करत बार बार । मूषकवाहन सवार भक्तन हितकारे ॥ पूरण गुणगणनिधान सुरमुनियश करत गान । ब्रह्मानन्द चरणध्यान सकल काज सारे …

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जय गणेश गणनाथ दयानिधि

शंकरा-त्रिताल जय गणेश गणनाथ दयानिधि । सकल विघन कर दूर हमारे ॥ प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारे । तिसके पूरण कारज सारे ॥ लम्बोदर गजवदन मनोहर । कर त्रिशूल परशूवर धारे ॥ ऋद्धि सिद्धि दोउ चमर डुलावे । मूषकवाहन परम सुखारे ॥ ब्रह्मादिक सुर ध्यावत मनमे । । ऋषिमुनिगण सब दास तुम्हारे ॥ ब्रह्मानन्द सहाय …

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