यमन-एकताल
प्रथम सुमर श्रीगणेश गौरीसुत प्रिय महेश ।
सकल विघन भय कलेश दूर से निवारे ।।
लम्बोदर भुज विशाल कर त्रिशूल चन्द्र भाल ।
शोभत गल पुष्पमाल रक्तवसन धारे ।।
ऋद्धि सिद्धि दोउ नार चमर करत बार बार ।
मूषकवाहन सवार भक्तन हितकारे ॥
पूरण गुणगणनिधान सुरमुनियश करत गान ।
ब्रह्मानन्द चरणध्यान सकल काज सारे ॥