प्रथम सुमर श्रीगणेश

यमन-एकताल 

प्रथम सुमर श्रीगणेश गौरीसुत प्रिय महेश ।

सकल विघन भय कलेश दूर से निवारे ।।

लम्बोदर भुज विशाल कर त्रिशूल चन्द्र भाल ।

शोभत गल पुष्पमाल रक्तवसन धारे ।।

ऋद्धि सिद्धि दोउ नार चमर करत बार बार ।

मूषकवाहन सवार भक्तन हितकारे ॥

पूरण गुणगणनिधान सुरमुनियश करत गान ।

ब्रह्मानन्द चरणध्यान सकल काज सारे ॥

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